हाइड्रोकार्बन: 1. एलिफेटिक हाइड्रोकार्बन,2. एरोमेटिक हाइड्रोकार्बन (मेथेन,एथिलीन अथवा एथीन)

हाइड्रोकार्बन

वे योगिक जिनमें केवल कार्बन और हाइड्रोजन तत्व उपस्थित होते हैं हाइड्रोकार्बन कहलाते हैं।

हाइड्रोकार्बन दो प्रकार के होते हैं।

1.एलिफेटिक हाइड्रोकार्बन

2. एरोमेटिक हाइड्रोकार्बन

1. एलिफेटिक हाइड्रोकार्बन-: बे हाइड्रोकार्बन जिनमें कार्बन परमाणुओं की खुली विवृत श्रंखला होती है एलिफेटिक हाइड्रोकार्बन कहलाते हैं।

2. एरोमेटिक हाइड्रोकार्बन-: बे हाइड्रोकार्बन जिनमें छह कार्बन परमाणु बल के रूप में षटकोण में स्थित होते हैं चक्रण या एकल व द्विबन्द एकांतर क्रम में स्थित होते हैं एरोमेटिक हाइड्रोकार्बन कहलाते हैं। इन्हें एरिन भी कहते हैं।

मेथेन

उपस्थिति या स्रोत

मेथेन की खोज सर्वप्रथम सन 1776 में वोल्गा झील के किनारे जमी दलदली मिट्टी में की गई थी। अतः इसे मार्श गैस भी कहते हैं मार्श का अर्थ होता है, दलदली। इसकी खोज का श्रेय वोल्टा नामक वैज्ञानिक को जाता है यह गैस कोयले की खानों, प्राकृतिक गैस, दलदल आदि स्थानों में पाई जाती है कोयले की खानों में मेथेन गैस की उपस्थिति के कारण विस्फोट तथा आग लगने का खतरा रहता है। अतः इसे नम अग्नि भी कहते है। पेट्रोलियम द्वारा प्राप्त प्राकृतिक गैस में मिथेन की मात्रा 90% होती है तथा इसे इसमें कॉल गैस की मात्रा 35 से 45% तक होती है।

मेथेन बनाने की प्रयोगशाला विधि

सोडियम एसीटेट से

निर्जल सोडियम एसीटेट तथा सोडा लाइम के मिश्रण को गर्म करने पर मेथेन गैस निर्मित होती है।

सर्वप्रथम सोडियम एसीटेट तथा सोडा लाइम को  1:3 के अनुपात में लेकर कोपर या  कठोर कांच की परखनली में गर्म करते हैं परखनली में कार्क की सहायता से एक निकास नली लगा देते हैं जिसका दूसरा सिरा जल से भरी द्रोणिका में डूबा रहता है गरम करने के पश्चात मेथेन गैस निकास नली द्वारा जल से भरी द्रोणिका में उल्टे रखे गैस जार में एकत्र हो जाती है।

मेथेन गैस का शोधन

उपरोक्त विधि से प्राप्त मेथेन में हाइड्रोजन, एथिलीन और एसिटिलीन गैस अशुद्धि के रूप में उपस्थित होती है। इस अशुद्धि गैसीय मिश्रण को शुद्ध करने के लिए पहले अमोनियम क्यों प्रश्न क्लोराइड के विलियन में प्रवाहित करके एसिटिलीन गैस को पृथक कर लेते है। अब इस गैसीय मिश्रण को साद्र सल्फ्यूरिक अम्ल में  गुजारने पर एथिलीन अवशोषित हो जाती है इस प्रकार शुद्ध मिथेन प्राप्त होती है।

भौतिक गुण

1. यह एक गंदहीन, रंगहीन एवं स्वादहीन गैस है।

2. यह ज्वलनशील होती है।

3. इस का क्वथनांक  -164 डिग्री सेल्सियस तथा हिमांक  -184 डिग्री सेल्सियस होता है।

4. यह जल में अविलय परंतु कार्बनिक विलायको में विलय है।

5. यह वायु से हल्की होती है तथा एनटीपी पर इसका घनत्व 0.71 ग्राम प्रति लीटर होता है।

रासायनिक गुण

1. दहन: मेथेन वायु से क्रिया करके जलती है तथा विस्फोटक पदार्थ बनाती है।

2. जलवाष्प से क्रिया-: मेथेन तथा जलवायु जलवाष्प के मिश्रण को 800 डिग्री सेल्सियस ताप पर तप्त निकील उत्प्रेरक पर प्रवाहित करने पर मेथेन कार्बन मोनोऑक्साइड में परिवर्तित हो जाती है।

                     एथिलीन अथवा एथीन

उपस्थिति 

एथिलीन एक असंतृप्त गैस है जो प्राकृतिक गैस में कुछ मात्रा में पाई जाती है एल्कीन श्रेणी का यह प्रथम सदस्य है एथिलीन की मात्रा कोल गैस में लगभग 6% होती है इसकी उपस्थिति के कारण कांग्रेस को जलाने पर प्राप्त ज्वाला प्रकाश युक्त होती है सामान्य एथिलीन का निर्माण पेट्रोलियम के भंजक द्वारा होता है।

निर्माण की विधि

प्रयोगशाला विधि

एथिल अल्कोहल को सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ 160 से 170 डिग्री सेल्सियस ताप पर गर्म करने पर एथिलीन प्राप्त होती है।

एक गोल पेंदी के फ्लक्स में एथिल एल्कोहल तथा सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल के मिश्रण को 1:2 के अनुपात में मिला लेते हैं तथा इसमें निर्जल एल्यूमीनियम सल्फेट मिलाते हैं जिससे द्रव में झाग नहीं बने अब फ्लक्स को बालू ऊष्मक पर रखकर 160 से 170 डिग्री सेल्सियस ताप पर गर्म करते हैं तथा एथिलीन गैस निर्मित होती है।

भौतिक गुण

1. यह रंगहीन मीठी गन्ध वाली गैस है

2. यह जल में अल्प विलय वाली गैस है जो सुघने पर बेहोशी लाती है

3. इसका क्वथनांक -106 डिग्री सेल्सियस तथा हिमांक -169 डिग्री सेल्सियस होता है

4. यह एक ज्वलनशील गैस है

रासायनिक गुण

1.दहन-: वायु के आधिक्य में दहन कराने पर एथिलीन धुआंदार प्रकाश युक्त ज्वाला के साथ जलकर कार्बन डाइऑक्साइड तथा जल का निर्माण करती है।

2. ओजोन का योग अथवा ओजोनीकरण-: एथिलीन का ओजोनीकरण करने पर फॉर्मलडिहाइड के दो अणु निर्मित होते हैं।

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