पुनर्जागरण : यूरोप में पुनर्जागरण के कारण पुनर्जागरण की विशेषताएं पुर्नजागरण का प्रभाव

पुनजागरण फ्रांसीसी शब्द रेनेसां( रेने सान्स) का हिंदी रूपांतरण है। जिसका अर्थ है फिर से जीवित हो जाना। एडगर स्वेन के अनुसार पुनर्जागरण एक व्यापक शब्द है। जिसका प्रयोग उन सभी भौतिक परिवर्तनों के लिए किया जाता है। जो माध्य युग के अंत में तथा आधुनिक युग के प्रारंभ में दृष्टिगोचर हो रहे थे। दूसरे शब्दों में पुनर्जागरण से आशय उस अवस्था से है। जब मानव समाज अपनी पुरानी परंपराओं से जागकर नवीन उपयोगी परंपराओं के लिए उत्सुक हो जाता है। इस प्रकार जब प्राचीन परंपरा में क्रांतिकारी परिवर्तन होने के फलस्वरूप समाज में आमूल-चूल परिवर्तन हो जाता है। यह स्थिति पुनर्जागरण कहलाती है।

यूरोप में पुनर्जागरण के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे।

(1) धर्म- युद्धों का प्रभाव-: मध्य युग में तुर्कों और ईसाइयों के बीच धर्म प्रचार व पवित्र स्थलों की सुरक्षा को लेकर युद्ध हुए। इन युद्धों में ईसाइयों को भारी नुकसान हुआ। अपने धर्म स्थलों की रक्षा के लिए ईसाईयों ने बहुत सी यात्राएं की जिनसे नए विचारों एवं वातावरण से उनका संपर्क हुआ। उनके विचारों से संकीर्णता समाप्त हुई। उन्होंने चर्च और समाज के संबंध में व्यापक रूप से सोचना शुरू कर दिया। जिससे पुनर्जागरण का वातावरण तैयार होना शुरू हो गया।

2) तुर्कों का  कुस्तुनतुनिया पर अधिकार-: इस्लाम धर्म का प्रचार एवं प्रसार करने के उद्देश्य से तुर्को ने 1453 ईस्वी में ईसाइयों के पूर्वी रोमन साम्राज्य की राजधानी कुस्तुनतुनिया पर अधिकार कर लिया परिणाम स्वरूप पूर्वी यूरोप और बाल्कन प्रायद्वीप पर तुर्को का प्रभाव स्थापित हो गया। तुर्को ने ईसाइयों पर अत्याचार करना प्रारंभ कर दिया। फलक ईसाई विद्वानों ने अपने ज्ञान विज्ञान विभिन्न पुस्तकों के साथ इटली में पहुंचकर शरण ली।  इटली में पहले से ही पुनर्जागरण का आरंभ हो चुका था। इटली में संपूर्ण यूरोप में ज्ञान विज्ञान का प्रचार एवं प्रसार हुआ।

(3) छापेखाने का आविष्कार-: छापेखाने का आविष्कार के फलस्वरुप प्राचीन ज्ञान को सुरक्षित रखना सरल हो गया। साथ ही नवीन ज्ञान विज्ञान का प्रचार करने की सुविधा हो गई। लोग सुदूर तक विद्वानो से  परिचित हुए जिससे लोगों में जागृति आई।और पुनर्जागरण को बल मिला इसी समय 1777 ईस्वी में विलियम कैक्सटन ने इंग्लैंड में अपना छापाखाना खोला। इसके बाद पुस्तकों की छपाई का काम तेजी से बढ़ा।

(4) नगरों का विकास-: विभिन्न प्रकार के परिवर्तन के फलस्वरुप व्यापार में प्रगति हुई। जिससे विभिन्न नगरों का विकास हुआ। अब यह नगर व्यापार, उद्योग व शिक्षा के प्रमुख केंद्र बने। नगरों के विकास एवं व्यापारिक उन्नति के फलस्वरुप मध्य वर्ग का उदय हुआ। मध्य वर्ग के लोगों ने तेजी से नए विचारों को अपनाया और इससे भी पुनजागरण की गति तेज हुई।

(5) नए व्यापारिक मार्गों की खोज-: कुस्तुनतुनिया पर अधिकार हो जाने के कारण यूरोप का रास्ता पूर्वी देशों के लिए बंद हो गया। इस समस्या को सुलझाने के लिए यूरोप- वासी समुद्री मार्ग की खोज के लिए निकल पड़े पुर्तगाल फ्रांस, इटली, हालैंड आदि देशों के नाविक समुद्री मार्ग की खोज में चल पड़े। इससे समस्त यूरोप में नए युग का सूत्रपात हुआ।

(6) मंगोल साम्राज्य का उदय-: पुनर्जागरण में मंगोल साम्राज्य के उदय के कारण 13वीं शताब्दी में प्रसिद्ध मध्य एशिया विजेता चंगेज खान की मृत्यु के बाद कुबलाई खां ने एक विशाल साम्राज्य की स्थापना की इसकी राज्यसभा विद्वानों धर्म प्रचारो और व्यापारियों से सुशोभित थी। प्रसिद्ध वेनिस यात्री, मार्कोपोलो, कुबलाई खां के दरबार में सन 1272 इसवी में गया था। उसने अपनी यात्रा का विवरण लिखा जिसने  यूरोपवासियों के मानस को लंबे समय तक उदित किया। यह उल्लेखनीय है कि मंगोलों के संपर्क से यूरोप की कागज एवं मुद्रण कुतुबनुमा (आधुनिक दिशा सूचक यंत्र) तथा बारूद की सर्वप्रथम जानकारी प्राप्त हुई।

पुनर्जागरण की निम्न विशेषताएं हैं।

१. पुनर्जागरण के फलस्वरूप धार्मिक विषयों  के स्थान पर विज्ञान सौंदर्यशास्त्र इतिहास, भूगोल जैसे विषय काअध्ययन -अध्यापन प्रारंभ हुआ।

२. पुनर्जागरण के फलस्वरुप कला को प्रोत्साहन दिया गया।

३. जनता में आलोचनात्मक एवं अनुवेशात्मक प्रवृत्ति पैदा हुई।

४. पुनर्जागरण  ने सदियों से चली आ रही मान्यताओं को आलोचनात्मक ढंग से सोचने के लिए प्रेरित कर दिया।

५. लैटिन व युनानी भाषा के स्थान पर लोकभाषा को विशेष महत्व प्राप्त हुआ।

६. मध्ययुगीन  मान्यताओं को तर्क के आधार पर खंडित किया गया और नवीन मान्यताओं को प्रतिष्ठा प्राप्त हुई) आर्थिक दशा और व्यापार में प्रगति-: पुनर्जागरण के फलस्वरुप नए देशों की खोज की गई। इससे नए देश बाजार के रूप में प्रयोग किए गए उनसे कच्चे माल की उपलब्धता बढी सस्ते श्रमिक उपलब्ध होने लगे। इससे व्यापार एवं उद्योग का क्षेत्र विकसित हुआ। पूंजीवाद और साम्राज्यवाद को बढ़ावा मिला। शोषण और वर्ग संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो गई। आर्थिक विकास के फलस्वरुप यूरोपीय देशों में संपन्नता बढ़ी और लोगों का जीवन बिलासी हो गया। यूरोप के सभी देशों में व्यापारिक प्रतिस्पर्धा बढ़ गई। धन कमाने की होड़ मच गई। उपदेशों की स्थापना होने लगी औद्योगिक नगरों की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ। बड़े बड़े उद्योगों का विकास प्रारंभ हुआ। व्यापारिक उन्नति के फलस्वरुप समाज में मध्य वर्ग का उदय हुआ।

(2) सामाजिक जीवन में प्रगति-:  पुनर्जागरण के फलस्वरुप मानव जीवन के दृष्टिकोण पर व्यापक प्रभाव पड़ा। अंधविश्वासी जीवन को सीमा से हटाकर वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया जाने लगा। सामंतवादी व्यवस्था समाप्त हो गई। समाज में मध्य वर्ग का उदय हुआ। जिससे राष्ट्रवाद की भावना विकसित होने लगी शिक्षा के प्रचार-प्रसार ने नए विचारों को जन्म दिया। इससे समाज में नवीन जागृति एव चेतना का संचार हुआ। समाज में फैली अशिक्षा एवं अज्ञानता से छुटकारा मिलने लगा।

(3) भाषा और साहित्य पर प्रभाव-: छपाई के कारण भाषा एवं साहित्य पर गहरा प्रभाव पड़ा। अन्य प्रस्तावों का प्रकाशन होने लगा इससे शिक्षा का भी प्रसार हुआ। और ज्ञान का विस्तार होने लगा।

(4) राष्ट्रीयता का विकास-: पुनजागरण के कारण नए राज्यों का जन्म हुआ। इससे राष्ट्रीयता की भावना बढ़ने लगी। सामंतवाद का अंत हो जाने से शक्तिशाली राज्यों का उदय हुआ। जिससे राष्ट्रीयता की भावना विकसित होने लगी।

(2) सामाजिक जीवन में प्रगति-:  पुनर्जागरण के फलस्वरुप मानव जीवन के दृष्टिकोण पर व्यापक प्रभाव पड़ा। अंधविश्वासी जीवन को सीमा से हटाकर वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया जाने लगा। सामंतवादी व्यवस्था समाप्त हो गई। समाज में मध्य वर्ग का उदय हुआ। जिससे राष्ट्रवाद की भावना विकसित होने लगी शिक्षा के प्रचार-प्रसार ने नए विचारों को जन्म दिया। इससे समाज में नवीन जागृति एव चेतना का संचार हुआ। समाज में फैली अशिक्षा एवं अज्ञानता से छुटकारा मिलने लगा।

(3) भाषा और साहित्य पर प्रभाव-: छपाई के कारण भाषा एवं साहित्य पर गहरा प्रभाव पड़ा। अन्य प्रस्तावों का प्रकाशन होने लगा इससे शिक्षा का भी प्रसार हुआ। और ज्ञान का विस्तार होने लगा।

(4) राष्ट्रीयता का विकास-: पुनजागरण के कारण नए राज्यों का जन्म हुआ। इससे राष्ट्रीयता की भावना बढ़ने लगी। सामंतवाद का अंत हो जाने से शक्तिशाली राज्यों का उदय हुआ। जिससे राष्ट्रीयता की भावना विकसित होने लगी।

(5) धर्म- सुधार आंदोलन का प्रारंभ-: तर्क एवं आलोचना दृष्टिकोण विकसित होने के कारण पॉप एवं चर्च की अनियमितताएं, बुराइयां स्पष्ट हो गई। विद्वानों तथा तात्कालिक लेखकों ने इस ओर लोगों का ध्यान आकृष्ट किया। इससे धार्मिक आंदोलन का मार्ग प्रस्तुत हुआ। इसे मार्टिन लूथर ने आगे बढ़ाया।

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