विश्वयुद्ध क्यों?, प्रथम विश्वयुद्ध के कारण ,प्रथम विश्वयुद्ध की घटनाए ,प्रथम विश्व युद्ध के परिणाम,

विश्वयुद्ध क्यों?

साम्राज्यवादी शक्तियों के बीच उपनिवेशो की छीना झपटी इनकी साम्राज्य लिप्सा विस्तार वादी महत्वकांक्षी तथा अपने उद्योग और व्यापार को संरक्षण देने की प्रवृत्ति के कारण इन यूरोपीय शक्तियों के बीच टकराव होते रहे।जिनके कारण यूरोप में तनाव बढ़ गया इसी समय सेरोजिवो से आस्ट्रेलिया के युवराज और उसकी पत्नी की हत्याकांड के फलस्वरुप 28 जुलाई 1914 ईस्वी को एक ऐसा युद्ध प्रारंभ हो गया। जिसने संपूर्ण विश्व को प्रभावित किया। इस लड़ाई में जितनी बर्बादी हुई उतनी मानव इतिहास में पहले कभी नहीं हुई थी। वास्तव में यह सर्व- व्यापी युद्ध था।

 इस युद्ध की अवधि लगभग 4 वर्षों तक (1914 से 1918) की थी।

प्रथम विश्वयुद्ध के कारण

(1)जर्मनी का एकीकरण एवं उत्थान-: औद्योगिक उत्थान के बाद जर्मनी भी साम्राज्य विस्तार की दौड़ में शामिल हो गया। जिससे रोस्ट होकर ब्रिटेन और फ्रांस ने इसका कड़ा विरोध किया। विरोध आगे चलकर प्रथम विश्व युद्ध का कारण बना।

(2) विरोधी गुटों का उदय-: साम्राज्यवाद व सीमा विस्तार की प्रवृत्ति में यूरोप में चल रहे अपनी आपसी एवं सैन्य व तनाव के कारण दो विरोधी गुटों का सृजन हुआ अपने हितों की पूर्ति के लिए विभिन्न देश परस्पर विरोधी गुटों में शामिल होकर अपनी सैन्य शक्ति का विस्तार करने लगे इन दोनों अंतर विरोधी गुटों के निर्माण से सिद्ध हो गया कि  कालांतर में एक भयंकर युद्ध होकर रहेगा।

(3) बाल्कन समस्या-: यूरोप की छह महाशक्तियां-ब्रिटेन, जर्मनी, ऑस्ट्रिया, हंगरी, रूस, इटली और फ्रांस  बाल्कन प्रायद्वीप के देशों को लेकर उलझ गए। वह बाल्कन प्रायद्वीप के देश तुर्की साम्राज्य के अधीन थे। किंतु 19वीं शताब्दी में तुर्की साम्राज्य पतन की ओर गतिशील हो गया था। इस प्रकार इन राष्ट्रो की परस्पर शत्रुता ने प्रथम विश्व युद्ध की पृष्ठभूमि तैयार कर दी।

(4) मोरक्को संकट-: प्रथम युद्ध के पूर्वी यूरोप में कई ऐसी घटनाएं हुई जिनके कारण तनाव चरम पर पहुंच गया। इनमें से एक था। मोरक्को को लेकर फ्रांस और ब्रिटेन के बीच टकराव को समाप्त करने के लिए ब्रिटेन और फ्रांस ने 1904 ईसवी में एक समझौता किया। किंतु जर्मन और फ्रांस मोरक्को पर आधिपत्य स्थापित करने के प्रश्न पर भावी युद्ध की तैयारी में संलग्न हो गए।

(5) सैनिक तैयारियां-: आपसी वैमनस्य प्रतिस्पर्धा के कारण शक्ति संपन्न राष्ट्र एक दूसरे से भयभीत होकर सैनिक तैयारियों में जुट गए। साथ ही आपस में सैनिक संध्या भी करने लगे अतः सैनिक तैयारियों ने भी प्रथम विश्व युद्ध में आग में घी डालने का काम किया।

(6) तात्कालिक कारण-: जर्मनी ने ऑस्ट्रिया का व रूस ने सब्रिया का पक्ष लिया इस घटना के परिणाम स्वरूप 28 जुलाई 1914 ईस्वी को ऑस्ट्रिया ने सर्बिया के खिलाफ़ युद्ध की घोषणा कर दी।

प्रथम विश्वयुद्ध की घटनाए

(1) रूसी क्रांति और रूस का युद्ध से हटना-: 1917 ईस्वी की रूसी क्रांति और उसके बाद रूस का युद्ध से हट जाना एक महत्वपूर्ण घटना थी। क्रांतिकारी प्रारंभ से ही युद्ध का विरोध कर रहे थे। क्योंकि इस युद्ध में रूसी साम्राज्य को भारी नुकसान उठाना पड़ा रहा था। उसके छह लाख से अधिक सैनिक मारे जा चुके थे। रूसी नेता लेनिन ने जर्मनी के साथ ब्रेस्टलिटोवस्क की संधि करके रूस को युद्ध से अलग कर लिया।

(2) संयुक्त राज्य अमेरिका का युद्ध में शामिल होना-: 6 अप्रैल 1917 ईस्वी को अमेरिका ने जर्मनी के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी। अमेरिका ने इस युद्ध में शामिल होने के कई कारण थे। प्रथम अमेरिका जर्मन को एक शक्तिशाली प्रतिद्वंदी के रूप में नहीं देखना चाहता था। अमेरिका त्रिदेशीय संधि के देशों फ्रांस, ब्रिटेन, रूस आदि को शस्त्र व अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति करता था।

(3) इटली का युद्ध-: तीन गुट का सदस्य होते हुए भी इटली प्रारंभ से तटस्थता की नीति अपनाता रहा। बाद में उसने मित्र राष्ट्र के लालच में आकर 23 मई 1915 को जर्मनी और ऑस्ट्रिया के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी। 1917 ईस्वी में दोनों पक्षों के सेनाओं में आईसेंजों नदी के तट पर विश्व युद्ध हुआ। जिसमें इटली की सेनाओं को पीछे हटना पड़ा।

(4) युद्ध का अंत (ऑस्ट्रिया और जर्मनी की पराजय)-: जुलाई 1918 ईस्वी में ब्रिटेन, फ्रांस और अमेरिका ने संयुक्त सैनिक अभियान आरंभ किया। इस संयुक्त सैन्य सेना के अभियान को जर्मनी रोकने में असफल रहा। जर्मन सम्राट कैसर  विलियम द्वितीय देश छोड़कर भाग गया। और उसने हालैंड में शरण ली। जर्मनी एक गणराज्य बन गया। जर्मनी की नई सरकार ने 11 नवंबर 1918 ईसवी को युद्ध विराम संधि पर हस्ताक्षर कर दिए। इस प्रकार यह महा विनाशकारी युद्ध समाप्त हो गया।

प्रथम विश्व युद्ध के परिणाम

(1) जनधन की हानि-: इस महायुद्ध में जन धन की अभूतपूर्व हानि हुई। भीषण नरसंहार हुआ। विश्वयुद्ध में मित्र राष्ट्रों के 50 लाख से अधिक व्यक्ति मारे गए। लगभग

 एक करोड़ घायल हुए। और अपंग हो गए यूरोप की अर्थव्यवस्था भी चौपट हो गई। और संपूर्ण विश्व आर्थिक मंदी का शिकार हो गया।

(2) निरंकुश राजतंत्र का अंत-: प्रथम विश्व युद्ध के फल- स्वरुप जर्मनी, फिनलैंड, टर्की आदि देशों में निरंकुश राजशाही का अंत हो गया।

(3) गणतंत्र शासन की स्थापना-: प्रथम विश्व युद्ध के फलस्वरुप जर्मनी, पोलैंड और यूक्रेन आदि राज्यों में गणतंत्र की स्थापना हुई।

(4) नए राज्यो की स्थापना-: यूरोप में प्रथम विश्व युद्ध के बाद आत्म निर्णय के आधार पर 8 नए राज्य का निर्माण हुआ।

(5) पेरिस का शांति सम्मेलन-: जनवरी 1919और जून 1919 ईस्वी के बीच विजेता शक्तियों का एक सम्मेलन पेरिस में आयोजित हुआ यद्यपि इस शांति सम्मेलन में दुनिया के 27 देशों ने भाग लिया था।

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