भारत की कृषि: ऋतुओं के आधार पर फसलों का वर्गीकरण

भारत की कृषि

भारत के कुछ भारत के कुल क्षेत्रफल का लगभग 51% भाग पर कृषि, 4% भूभाग पर चारागाह, लगभग 21% भूमि पर वन एवं 24% भूमि बंजर तथा बिना उपयोग की है। कृषि राज्य का विषय है जिसका उल्लेख संविधान की आठवीं अनुसूची के पृष्ठ 14 में हैं।

भारत के अंतरिम मंत्रिमंडल 1940 ईस्वी में स्वतंत्र भारत के पहले मंत्रिमंडल 1947 ईस्वी में कृषि और खाद्य मंत्री  डॉ. राजेंद्र प्रसाद को बनाया गया। देश की कुल श्रमशक्ति का लगभग 48.9% भाग कृषि एवं इससे संबंधित उद्योग धंधों से अपनी आजीविका चलाता है। 2013-14 ईस्वी में भारत के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि का योगदान 13.9% है। भारत में खदानों के अंतर्गत आने वाले कुल क्षेत्र के 47% भाग पर चावल की खेती की जाती है। भारत में मुख्य खाद्य फसल चावल है भारत विश्व का 21.7 प्रतिशत चावल उत्पन्न करता है विश्व में गेहूं उत्पादन में चीन के बाद भारत का दूसरा स्थान है भारत विश्व का 12% गेहूं उत्पन करता है देश की कुल कृषि योग्य भूमि के लगभग 14 प्रतिशत भाग पर गेहूं की खेती की जाती है देश में गेहूं के उत्पादन में उत्तर प्रदेश का प्रथम स्थान है जबकि प्रति हेक्टेयर उत्पादन में पंजाब का स्थान प्रथम है। हरित क्रांति का सबसे अधिक प्रभाव गेहूं और चावल की खेती पर पड़ा है परंतु चावल की तुलना में गेहूं के उत्पादन में अधिक वृद्धि हुई है। भारत और वर्क उत्पादन एवं उपयोग में विश्व में तीसरे स्थान पर है जबकि चीन एवं अमेरिका क्रमश पहले व दूसरे स्थान पर है 

भारत नाइट्रोजन उर्वरकों की अपनी खपत का 94% व फास्फेटिक उर्वरकों की खपत का 82% ही उत्पादन करता है। पोटेशियम उर्वरक का पूरी तरह आयात किया जाता है। आम, केला, चीकू, खट्टे नींबू, काली मिर्च, नारियल, अदरक, हल्दी के उत्पादन में भारत का स्थान विश्व में पहला है। फलों एवं सब्जियों के उत्पादन में भारत का स्थान विश्व में दूसरा है पहले स्थान पर चीन है विश्व में तंबाकू का सबसे बड़ा उत्पादन एवं उपभोक्ता चीन है तंबाकू उत्पादन में भारत का स्थान तीसरा है। तंबाकू की पत्तियों को सुखाने की प्रक्रिया को क्यूरिंग कहते हैं जिससे पत्तियों में वांछित रंग, गंध आदि गुणों का विकास होता है।  भारत में चाय की खेती 1840 ई. में असम की ब्रह्मपुत्र घाटी में प्रारंभ हुई। चाय की पत्तियों में कैफीन की प्रचुर मात्रा पाई जाती है। सबसे उच्च कोटि का कहवा  अरेबिका होता है बाकी अन्य दो किस्में हैं। भारत में फूलों की खेती का 9% आकिड से प्राप्त होता है।यह एक रंगीन एवं मनमोहक पौधा है इसका प्रयोग मुख्य रूप से इतर निर्माण में सजावट के रूप में खाध के रूप में एवं परंपरागत दवाइयों के निर्माण में किया जाता है। भारत में इसकी खेती उत्तर-पूर्वी जलवायु क्षेत्रों में की जाती है अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, आर्केड की कृषि के लिए उपयुक्त क्षेत्र हैं। क्लस्टर एक बीन एवं लेग्युमिनस फसल है। ग्वार के बीज ग्वार गोंद को उत्पन्न करने के लिए कच्चे पदार्थ के रूप में प्रयोग होते हैं। वैश्विक स्तर पर तेल और गैस उद्योग द्वारा इसका प्रयोग स्ट्रिक्टली वेंचरिंग तकनीक में क्या जाता है। वर्तमान में सेल गैस के निष्कर्ष के द्वारा ग्वार गोंद की मांग है। भारत विश्व में ग्वार का बड़ा उत्पादक देश है।

राजस्थान ग्वार गोंद का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। तथा कनार्टक सुपारी का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है।(कुल उत्पादन का 40%)

लंबे रेशे वाली अमेरिकन कपास को देश के उत्तरी पश्चिमी भाग में नरमा कहा जाता है कपास पर फूल आने के समय आकाश बादल रहित होना चाहिए दलहनी फसलों के उत्पादन हेतु कोबाल्ट आवश्यक तत्व है।

     ऋतुओं के आधार पर फसलों का वर्गीकरण

1. रबी की फसल-: यह अक्टूबर-नवंबर में बोई जाती है और मार्च-अप्रैल में कॉस्टली जाती है इसकी मुख्य फसलें हैं गेहूं, जो, चना, मटर, सरसों, आलू, अलसी आदि।

2. खरीफ की फसल-: यह जून-जुलाई में बोई जाती है और नवंबर- दिसंबर में काट ली जाती है इसकी मुख्य फसलें हैं धान, गन्ना, तिलहन, ज्वार, बाजरा, मक्का, अरहर, कपास, मूंगफली, मंडुआ, तिलहन, सोयाबीन आदि।

3. गरमा की फसल-: यह मई-जून में बोई जाती है और जुलाई-अगस्त में काट ली जाती है इसकी मुख्य फसलें हैं राई, मक्का, ज्वार, जूट और मडुआ।

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