पाचन तंत्र, पाचक ग्रंथियां

पाचन तंत्र

भोजन के रूप में ग्रहण किए गए जटिल पदार्थों को शरीर द्वारा प्रयोग में लाए जाने वाले उपयुक्त सरल रूप से अब घटित करने की क्रिया पाचन कहलाती है इस क्रिया को कार्यान्वित करने के लिए मानव शरीर में एक संपूर्ण तंत्र पाया जाता है जिसे पाचन तंत्र कहते हैं।

आहारनाल-: मानव की आहार नाल लगभग 8 से 10 मीटर लंबी होती है तथा मुख्य द्वार से गुदा द्वार तक फैली रहती है इसका विभिन्न भागों में अलग-अलग व्यास होता है कार्यकी के आधार पर इसमें निम्न भाग होते हैं।

1. मुख या मुख गुहिका-: मुख एक अनुप्रस्थ काट के रूप में मानव शरीर के प्रति पृष्ठ तल पर स्थित होता है तथा दो मांसल तथा चल होठों से घिरी रहती है मुख्य द्वार पीछे की तरफ मुख गुहिका में खुलता है इसमें एक जीभ होती है जो पीछे की ओर जुड़ी हुई तथा आगे स्वतंत्र होती है साथ ही मुख गुहिका में बाएं से दाएं और गालो से घिरी रहती है। मुख गुहिका की छत तालु कहलाती है।

2. ग्रसनी-: मुख्य गुहिका का पिछला भाग ही ग्रसनी कहलाता है यह लगभग 12 से 14 सेंटीमीटर लंबी कीप आकार  नली होती है जो वायु व भोजन का सह मार्ग होती है इसकी इसके अतिरिक्त यह बोलते समय ध्वनि की गूंज उत्पन्न करने में सहायता करती है ग्रसनी के अंदर एक बड़ा छिद्र होता है जो निगलद्वार कहलाता है। इसके पास ही श्वसन नली का छिद्र अथवा घाटी द्वार होता है।

छोटी आंत-: यह भोजन के पाचन तथा अवशोषण का मुख्य केंद्र होती है यह लगभग 6 से 7 मीटर लंबी तथा 2.5 सेंटीमीटर चौड़ी और अत्यधिक कुंडलिक नली होती है इसमें अधिकतर भाग में प्रसंग कुरु पाए जाते हैं जो भोजन के पाचन तथा अवशोषण के लिए सहायक होते हैं।

बड़ी आंत-: यह आहार नाल का अंतिम भाग है यह लगभग 1.5 मीटर लंबी तथा 4.7 सेंटीमीटर चौड़ी लंबी नलिका होती है इस भाग में पचे हुए शेष भोजन का तथा जल का अवशोषण होता है और साथ ही उक्त भोजन को शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है छोटी आंत तथा बड़ी आंत के संधि स्थल पर एक शेषान्त्र उण्डुकीय कपाट होता है।

पाचक ग्रंथियां

1.लार ग्रंथियां-: मनुष्य में निम्न तीन जोड़ी लार ग्रंथियां पाई जाती है जो प्रतिदिन लगभग 1.5 लीटर लाल का श्रावण करती हैं।

2. आमाशयी या जठर ग्रंथियां-: अमाशय की दीवार में तीन प्रकार की जठर ग्रंथियां पाई जाती है जो हर सरस का श्रावण करती है।

3. यकृत(liver)-: यह मानव शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि एवं अंग है इसका भार लगभग पंद्रह सौ ग्राम होता है यह उदर गुहा में डायाफ्राम के नीचे तथा आमाशय के ऊपर स्थित होता है वह नाक में यह यकृत मानव के यकृत में तीन पालिया होती है यकृत के पिंड अनेक बहू भुजिया विंडो से बने होते हैं जिन्हें गिल्सन संपुट कहते हैं इन प्रिंटर को से यकृत कोशिकाओं का निर्माण होता है जिससे पितरस स्रावित होता है यह पितरस यकृत के निकट स्थित थैलीनुमा संरचना ‘पित्ताशय’ में एकत्रित हो जाता है इसमें पाचक एंजाइम नहीं होते हैं किंतु यह वसा के पाचन में सहायक होता है।

4. अग्नाशय-: यह यकृत के बाद शरीर की दूसरी सबसे बड़ी ग्रंथि है यह लगभग 12 से 15 सेंटीमीटर लंबी तथा J के आकार की होती है। यह उदर गुहा में अमान्य तथा शेषान्त्र के बीच स्थित होती है सामान्य व्यक्ति में इसका भार 60 से 90 ग्राम होता है। यह एक मिश्रित ग्रंथि है यह छोटे-छोटे पिंडको से बनी संरचना है। जिसकी कोशिकाएं कलाकार तथा स्त्रावी होती है पिण्डको  के मध्य लैगरलहैन्स की कोशिकाएं होती हैं। जो अग्नाशय का अंत स्रावी भाग बनाती है इसका वाहय भाग क्षारीय रस का श्रावण करता है तथा अंतः स्रावी भाग हार्मोन का श्रावण करता है।

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