भारत की प्रमुख झीलें

भारत की प्रमुख झीलें

भारत की सबसे बड़ी तटीय झील चिल्का झील (ओड़िशा) है। जो खारे पानी की एक लैगुन झील है। यहां नौसेना का प्रशिक्षण केंद्र भी है। वर्षा ऋतु में चिल्का झील का दाया और वर्ग भी नदी के जल प्राप्त होता है। इस झील की लंबाई 65 किलोमीटर तथा चौड़ाई 8 से 20 किलोमीटर और गहराई लगभग 2 मीटर है। भारत में सबसे अधिक खारे पानी की झील सांभर झील क्षेत्रफल 235 किलो मीटर स्क्वायर (राजस्थान में) है ।भारत में सबसे बड़ी मीठे पानी की झील वूलर झील जो 160 किलो मीटर स्क्वायर क्षेत्रफल में फैली है जम्मू कश्मीर में स्थित है। तुलबुल परियोजना इसी पर स्थित है भारत के सबसे बड़ी कृत्रिम झील गोविंद बल्लभ पंत सागर है जो रिहंद नदी पर बनाए गए बांध से बना है। पहाड़ियों से घिरे अभिकेंद्री अफवाह वाले विस्तृत समतल गतृ कहते हैं। चौरस सतह तथा अन् प्रवाहित द्रोणी वाली छोटी झीलो को प्लाया कहते हैं। इसमें वर्षा वर्षा का पानी जमा होता है। परंतु जल्द ही भाप बनकर उड़ जाता है। अधिक नमक वाली प्लाया को शैली- नाश कहते हैं। प्लाया को अरब रेगिस्तान में खबारी तथा ममलाहा तथा सहारा में शिट्ट कहा जाता है। सांभर व डीडवाना थार मरुस्थल के पूर्वी सिरे पर खारे पानी की झील है। साभर झील बालसन का, डीडवाना झील प्लाया का उदाहरण है। भारत में सबसे अधिक ऊंचाई पर स्थित झील चोलामू झील है तीस्ता नदी का उद्गम यहीं से होता है महाराष्ट्र के बुलढाना जिले में स्थित लोनार झील ज्वालामुखी उद्गार से बनी झील है। नागार्जुन सागर (नालगोंडा जिला तेलंगाना तथा गुटर जिला आंध्र प्रदेश) कृष्णा नदी पर निजाम सागर (तेलंगाना) मजरा नदी पर मानव निर्मित झील है। हुसैनसागर झील हैदराबाद व सिकंदराबाद के मध्य स्थित है। पश्चिमी तट पर स्थित झील केरल एवं लैगून झील है। भारत का सबसे छोटा राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच 47a वेलिंगटन द्वीप पर स्थित है

पूर्वी तट पर स्थित पुलकित झील भारत की दूसरी सबसे बड़ी लैगून झील है इसका 84% भाग आंध्र प्रदेश एवं 16% भाग तमिलनाडु में पड़ता है। बैरियर टापू जिसका नाम हरिकोटा है इसे बंगाल की खाड़ी से अलग करता है। हरिकोटा द्वीप पर सतीश धवन उपग्रह परीक्षण केंद्र है।

पुलिकट झील के आंध्र प्रदेश वाले हिस्से में 1976 ईस्वी में तथा तमिलनाडु वाले हिस्से में 1980 ईस्वी में एक पक्षी अभयारण्य स्थापित किया गया।

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