हाइड्रोकार्बन के व्युत्पन्न :एथिल एल्कोहल अथवा एथेनॉल ,एथिल एल्कोहल के निर्माण की विधि,भौतिक गुण, रासायनिक गुण, साबुन, साबुन के प्रकार, साबुन के उपयोग

हाइड्रोकार्बन के व्युत्पन्न

वे योगिक जो हाइड्रोकार्बन  हाइड्रोजन परमाणु को किसी अन्य परमाणु या परमाणुओं के समूह द्वारा प्रतिस्थापित करने पर प्राप्त होते हैं हाइड्रोकार्बन  के व्युत्पन्न कहलाते है। उदाहरण-: क्लोरोएथेन, एथेनॉल आदि।

एथिल एल्कोहल अथवा एथेनॉल

 सामान्यतः एथिल एल्कोहल को ‘एल्कोहल’ कहते हैं इसमें – OH समूह संतृप्त कार्बन परमाणु से जुड़ा होता है यह प्रकृति में सुगंधित तेलों तथा फलों में एस्टरों के रूप में उपस्थित होता है इसे प्रायः स्टार्च युक्त अनाजों से बनाया जाता है अतः यह अनन्न एल्कोहल कहलाता है। यह शराब का मुख्य अवयव है।

एथिल एल्कोहल के निर्माण की विधि

एथिल ब्रोमाइड के जल अपघटन द्वारा

एथिल ब्रोमाइड को सोडियम हाइड्रोक्साइड के जलीय विलयन या नम सिल्वर ऑक्साइड के साथ गर्म करने पर एथिल एल्कोहल निर्मित होता है।

एथिलीन के जलयोजन द्वारा

जब एथिलीन को सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ मिलाकर गर्म किया जाता है तो योगात्मक अभिक्रिया द्वारा एथिल हाइड्रोजन सल्फेट प्राप्त होता है एथिल हाइड्रोजन सल्फेट को जल अपघटित करने पर एथेनॉल प्राप्त होता है।

भौतिक गुण

1. यह एक रंगहीन, ज्वलनशील द्रव है।

2. इसका क्वथनांक 78.1 डिग्री सेल्सियस तथा आपेक्षिक घनत्व 0.789 होता है।

3. इसमें एक विशेष गंध होती है तथा यह स्वाद में तीखा होता है।

4. यह एक आद्रता ग्राही द्रव है तथा उत्तम उद्दीपक है।

5. यह उदासीन होता है।

रासायनिक गुण

1. हाइड्रोजन परमाणु के कारण अभिक्रिया

इस अभिक्रिया में OH का H- परमाणु अन्य परमाणु या परमाणुओं के समूह द्वारा प्रतिस्थापित हो जाता है।

2. OH समूह के साथ अभिक्रिया

इस अभिक्रिया में एथिल एल्कोहल का संपूर्ण OH समूह अन्य परमाणुओं या परमाणुओं के समूह द्वारा प्रतिस्थापित हो जाता है।

साबुन

उच्च अणुभार वाले मोनोकाबोक्सिलक अम्लों के सोडियम तथा पोटेशियम लवण साबुन कहलाते हैं।

साबुन को बनाने में प्रायः कच्चा माल उपयोग किया जाता है।

अच्छे साबुन की विशेषताएं

1. साबुन क्षार रहित होना चाहिए क्योंकि क्षार वस्तुओं तथा त्वचा को हानि पहुंचाता है।

2. प्रयोग में लाने पर साबुन चटकना नहीं चाहिए।

3. साबुन चिकना तथा मुलायम होना चाहिए। खुरदरा साबुन अच्छा नहीं होता है।

4. साबुन में जल की मात्रा 10% से अधिक नहीं होनी चाहिए।

5. इसमें कीटनाशक पदार्थ मिले होने चाहिए।

साबुन के प्रकार

1. कठोर साबुन-: जब साबुन के निर्माण में बसा के अतिरिक्त 4 के रूप में कास्टिक सोडा प्रयुक्त किया जाता है तो कठोर साबुन प्राप्त होता है यह जल के साथ कम झाग बनाता है।

2. मृदु साबुन-: जब साबुन के निर्माण में बसा के अतिरिक्त क्षार के रूप में कास्टिक पोटाश का प्रयोग किया जाता है तो मृदू साबुन की प्राप्ति होती है यह जल के साथ अधिक झाग देता है।

साबुन के उपयोग

1. साबुन का मुख्य रूप से उपयोग शरीर एवं कपड़ों की गंदगी दूर करने में करते हैं।

2. चर्म रोगों के उपचार में चिकित्सा साबुन का उपयोग किया जाता है उदाहरण-: नीम का साबुन, डिटोल का साबुन, सल्फर साबुन आदि।

3. सेविंग साबुन का उपयोग दाढ़ी बनाने में किया जाता है।

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