ऊष्मीय प्रसार :ठोसो में उष्मीय प्रसार,ठोसो में उष्मीय प्रसार के प्रकार,दैनिक जीवन में ठोसो के ऊष्मीय प्रसार का उपयोग

ऊष्मीय प्रसार

ऊष्मा

ऊष्मा एक प्रकार की ऊर्जा है। जिसे ग्रहण करने पर वस्तु के ताप में वृद्धि हो जाती है तथा परित्याग करने पर वस्तु के ताप में कमी हो जाती है।

ऊष्मीय प्रसार

जब किसी पदार्थ को गर्म किया जाता है तो वह पदार्थ गर्मी पाकर फैलने लगता है जिस कारण उसके आकार में वृद्धि हो जाती है गर्मी पाकर पदार्थ का फैलना ही उष्मीय प्रसार कहलाता है। ठोस, द्रव तथा गैस सभी में ऊष्मीय प्रसार होता है उदाहरण-: सड़क पर लगे टेलीफोन के तार ग्रीष्म ऋतु में  गर्मी के कारण लंबाई में बढ़ जाते हैं तथा खंभों के बीच ढीले पड़ जाते हैं।

अपवाद-: कुछ पदार्थ तो ऊष्मीय प्रसार के अपवाद भी हैं जो गर्म होने पर सिकुड़ते हैं तथा ठंडा करने पर फैलते है। जैसे-: जल जीरो डिग्री सेल्सियस से 4 डिग्री सेल्सियस तक गर्म करने पर सिकुड़ता है तथा 4 डिग्री सेल्सियस के बाद गर्म करने पर फैलता है। सिल्वर आयोडाइड भी 80 डिग्री सेल्सियस से 142 डिग्री सेल्सियस तक गर्म करने पर सिकुड़ता है।

ठोसो में उष्मीय प्रसार

ठोसो का एक निश्चित आयतन व एक निश्चित आकार होता है जिस कारण यदि किसी ठोस को ऊष्मा दी जाती है अर्थात गर्म किया जाता है तो ठोस ऊष्मा ग्रहण करके सभी दिशाओं में समान रूप से फैल जाता है यह प्रसार ठोसों में ऊष्मीय प्रसार कहलाता है। समान रूप से गर्म करने पर भिन्न-भिन्न  ठोसों में ऊष्मीय प्रसार भिन्न – भिन्न  होता है।

ठोसो में उष्मीय प्रसार के प्रकार

जब किसी ठोस पदार्थ को गर्म किया जाता है तो उस पदार्थ की लंबाई, चौड़ाई व मोटाई में वृद्धि होती है। इस आधार पर ठोसों में ऊष्मीय प्रसार तीन प्रकार का होता है।

(1) अनुदैध्य  अथवा रेखीय प्रसार।

(2) क्षेत्रीय प्रसार।

(3) आयतन प्रसार।

दैनिक जीवन में ठोसो के ऊष्मीय प्रसार का उपयोग

(1) लकड़ी के पहिए पर लोहे की हाल चढ़ाना

लकड़ी के पहिए को लंबे समय तक उपयोग में लेने के लिए इनके ऊपर लोहे की हाल चढ़ाई जाती है लोहे की हाल का आकार पहिए के आकार से थोड़ा  छोटा होता है अतः इसे गर्म  करके प्रसारित किया जाता है तथा लकड़ी के पहिए पर चढ़ा दिया जाता है यह ठंडा होकर सुगमता से लकड़ी के पहिए की ऊपरी सतह पर फिट हो जाता है।

(2) रेल की पटरी बिछाते समय उनके बीच थोड़ा स्थान छोड़ा जाना

रेल की पटरिया बिछाते समय उनके बीच थोड़ा स्थान छोड़ा जाता है जिससे गर्मीयो में रेल गुजरते समय पटरी गर्म होने टेढ़ी-मेढ़ी न हो जाए ।

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